Jeevan dharam

Krishna sakhi is about our daily life routine, society, culture, entertainment, lifestyle.

Friday, 1 September 2017

เค…เค—เคฐ เคฌเฅाเคจा เคนो เคต्เคฏाเคชाเคฐ-เคต्เคฏเคตเคธाเคฏ

No comments :

अगर आपका व्यापार-व्यवसाय मंदा चल रहा है। किसी भी काम के शुरू करने के बाद उसमें ऐसा लाभ नहीं मिलता जैसा सोच रहे हैं, दुकान खुब सजाधजा कर रखने पर भी उसमें ग्राहक नहीं आते तो अब चिंता की बात नहीं है। हम आपको ऐसे कुछ सिद्ध टोटके बता रहे हैं जिससे थोड़े से प्रयास से आपको बेहतर परिणाम मिलेंगे। लेकिन इन प्रयोगों को करने से पहले आपको मन में कुछ बातें ठाननी पड़ेंगी। एक, हमेशा सत्य बोलेंगे, दूसरों का अहित नहीं करेंगे और तीसरा हमेशा अपना श्रेष्ठतम परिणाम देंगे। जब आप कोई टोटका प्रयोग में ला रहे हों तो इसके बारे में किसी को बताए नहीं, इससे टोटके का प्रभाव कम हो जाता है। इन टोटकों को आजमाइए, लाभ जरूर मिलेगा।

 

1. शनिवार को पीपल के पेड़ से एक पत्ता तोड़ लाएं, उसे धूप-बत्ती दिखाकर अपनी दुकान की गादी जिस पर आप बैठते हैं, उसके नीचे रख दें। सात शनिवार तक लगातार ऐसा ही करें। जब गादी के नीचे सात पत्ते इकट्ठे हो जाएं तो उन्हें एक साथ किसी तालाब या कुएं में बहा दें। व्यवसाय चल निकलेगा।

 

2. किसी ऐसी दुकान जो काफी चलती हो वहां से लोहे की कोई कील या नट आदि शनिवार के दिन खरीदकर, मांगकर या उठाकर ले आएं। काली उड़द के 10-15 दानों के साथ उसे एक शीशी में रख लें। धूप-दीप से पूजाकर ग्राहकों की नजरों से बचाकर दुकान में रख लें। व्यवसाय खुब चलेगा।

 

3. शनिवार को सात हरी मिर्च और सात नींबू की माला बनाकर दुकान में ऐसे टांगें कि उस पर ग्राहक की नजर पड़े।

เค˜เคฐ เค”เคฐ เค•ाเคฐ्เคฏเคธ्เคฅเคฒ เคฎें เคงเคจ เคตเคฐ्เคทा เค•े เคฒिเค

No comments :

इसके लिए आप अपने घर, दुकान या शोरूम में एक अलंकारिक फव्वारा रखें ! या 

एक मछलीघर जिसमें 8 सुनहरी व एक काली मछ्ली हो रखें ! इसको उत्तर या उत्तरपूर्व की ओर रखें ! यदि कोई मछ्ली मर जाय तो उसको निकाल कर नई मछ्ली लाकर उसमें डाल दें !

เคœเคนเคฐीเคฒे เคœाเคจเคตเคฐ เค•े เค•ाเคŸเคจे เค•ा เคŸोเคŸเค•ा

No comments :

प्रकृति के अनुसार कोई व्यक्ति जब अपने ही कर्मों के अनुसार दुख उठाता है और जब वह अपने किये की सजा पा लेता है तो मनुष्य ही उस व्यक्ति के दुखों को दूर करने का उपाय करता है। भौतिक कारणों के अनुसार व्यक्ति को बीमारी का इलाज करवाने के लिये अस्पताल में जाना पडता है,अगर व्यक्ति को दुख और उठाना है तो अस्पताल का डाक्टर नही मिलता है,मिलता भी है तो बीमारी को किसी तरह से नही पहिचान पाता है और बुखार की जगह पर अन्य किसी रोग की दवा करने लगता है,परिणाम में वह व्यक्ति जो दुख झेल रहा था,अन्य प्रकार की दवा खाने और उसके रियेक्सन करने के कारण नया दुख झेलने लगता है,तो वजाय दुख दूर होने और दुख मिलने लगते है। पुराने जमाने में कोई बडे डाक्टर अस्पताल नही थे,पुरुखों के पास केवल अनुभूत उपाय थे,जिनके द्वारा वे रोग को तुरत दूर कर देते थे, जैसे.

 

अगर किसी सुनसान स्थान या पेड के पास जाने पर वहां पर लगी बर्र या ततैया के झुंड के द्वारा आक्रमण करने पर व्यक्ति सहन शील होता है और विष को झेलने की हिम्मत होती है तो वह बच जाता है, अन्यथा जहरीला डंक व्यक्ति के प्राण ही लेलेता है, लेकिन इसी समय एक टोटका काम आता है,कि दाहिने हाथ के अंगूठे में अगर ततैया ने डंक मार दिया है तो फौरन बायें हाथ के अंगूठे को पानी से धो डालिये,विष का पता ही नही चलेगा कि ततैया या बर्र ने काटा भी है या नहीं, इसी बात के लिये जब तक डाक्टर के पास जाते, बर्र या ततैया के डंक को निकलवाते विष रोधी इन्जेक्सन लगवाते ,तो विष का दुख तो दूर हो जाता, लेकिन उस इन्जेक्सन का कुप्रभाव दिमाग की नशों को प्रभाव हीन भी कर सकता था।

 

सांप के विष से बचाव हेतु :

 

चौत्र मास की मेष संक्राति के दिन मसूर की दाल एवं नीम की पत्तियां खाएं। सर्प काट भी लेगा तो विष नहीं चढ़ेगा।  इसके अतिरिक्त प्रतिदिन प्रातः काल नीम की पत्तियां चबाकर पानी पीएं और घूमने जाएं, शरीर में विष रोधी क्षमता बढ़ेगी।