Jeevan dharam

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Monday, 20 August 2018

เคธเฅžेเคฆ เคฆाเค— เค•ी เคฆเคตाเคˆ

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सफ़ेद दाग के रोगी को नमक कम से कम खाना चाहिए। अच्छे परिणाम के लिए सैंधा नमक खाए। दूध के साथ कोई भी नमक वाली वस्तु ना खाए। चाय बंद कर दे। यदि कुछ दिन दूध भी बंद कर दे तो अधिक लाभ होगा। चीनी, गुड व अन्य मीठा भी कम कर दे।

सफ़ेद दाग की दवाई शुरू करने से पहले पेट साफ की दवाई (Duphalac 25ml )जरूर ले। दवाई शुरू करने के बाद भी हर 15 दिन मे पेट साफ़ की दवाई जरूर ले। इससे लाभ जल्दी होता है।

यह केवल कल्पना है कि सफ़ेद वस्तुए खाने से सफ़ेद दाग बढ़ते हैं। सच्चाई यह है कि मुली, चावल जैसी सफ़ेद वस्तुए इस रोग मे कोई हानि नहीं करती।

परहेज (कम से कम प्रयोग करे)–दही, लस्सी, उरद(माह) की दाल, सेम, पिट्ठी से बनी वस्तुए जैसे दहीबड़ा, कचौरी आदि, मछली, अंडा, चाउमीन, पिज्जा (चाउमीन/पिज्जा मे अजीनोमोटों का प्रयोग होता है)। खटाई जैसे इमली, नींबू, अमचूर, कांजी आदि, जलन करने वाले भोजन जैसे लाल/हरी मिर्च, राई, अदरक,रायता, शराब/सिरका आदि, अभिष्यन्दी जैसे दही, खीर, बर्फी, आइसक्रीम आदि, विरोधी भोजन (जैसे दूध के साथ नमक, खटाई,जामुन आम आदि, घी के ऊपर ठंडा पानी, पानी मे शहद आदि), अध्यशन (पहले खाए हुए भोजन के न पचने पर भी भोजन खा लेना), अजीर्ण (अपच) मे भोजन, खाना दिन मे सोना और रात मे जागना छोड़ दे। शाकाहारी बने।

चिकित्सा- सफ़ेद दाग पर 100% सफल प्रयोग
1- सोमराजी घृत : इस दवाई की प्रशंसा के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। अभी तक बहुत सी दवाइयाँ प्रयोग करी। परंतु इसके बराबर की और आसानी से बन जाने वाली दवाई दूसरी नहीं मिली। जो सालों तक चिकित्सा करवा कर थक चुके हों निराश हो गए हों उन्हे भी यह दवाई जरूर प्रयोग करनी चाहिए। यदि अच्छी तरह बनाई जाए तो यह कभी भी असफल नहीं होती। बहुत ध्यान से नोट करे। तौल मे बदलाव ना करे।

देशी घी- 800 ग्राम
खैर की छाल = 650 ग्राम
बावची = 150 ग्राम +150 ग्राम =300 ग्राम
परवल की जड़, भृंगराज, जवासा,कुटकी = 40 ग्राम प्रत्येक
गूगल = 80 ग्राम

1- देशी घी गाय का ले। पथमेड़ा गौशाला का घी सबसे अच्छा व विश्वनीय है। यदि पथमेड़ा का ना मिले तो विश्वनीय भैंस का घी ले।
2- खैर = Acacia Catechu (चित्र के लिए Google पर सर्च करे)। इसकी छाल सभी जड़ी बूटी वालो से आसानी से मिल जाती है।
3- बावची – यह काले रंग के बीज हैं जो सभी जड़ी बूटी वालों के यहाँ से मिल जाते हैं।
4- परवल की जड़ मिल जाए तो बहुत अच्छा नहीं तो इसके पत्ते मिल जाते हैं वह प्रयोग करे । भृंगराज, कुटकी व जवासा भी आसानी से मिल जाते हैं।
5- गूगल – यह एक पेड़ का गोंद है। यह 2 तरह का आता है। एक साधारण गुगुल दूसरा शुद्ध किया हुआ गुगुल। इस प्रयोग मे साधारण गुगुल (जिसे शुद्ध ना किया हो) ही प्रयोग करे। यह चिपचिपा होता है। इसलिए 2 दिन धूप मे रख कर सूखा ले। फिर कूट कर प्रयोग करे।

बनाने की विधि –
1- 650 ग्राम खैर की छाल व 150 ग्राम बावची को मोटा कूट कर रख ले।
2- 150 ग्राम बावची, भृंगराज, परवल व जवासे को बारीक पीस ले।
3- गूगल के छोटे टुकड़े बना ले।

650 ग्राम खैर की छाल + 150 ग्राम बावची को 6.500 किलो पानी मे पकाए। धीमी आग पर पकाए। जब लगभग 1.500 (डेढ़ किलो) ग्राम पानी रह जाए तब छान ले। ठंडा होने पर जो बचा हुआ अंश है उसे कपड़े मे से निचोड़ ले। यह काढ़ा साफ बर्तन मे 1 रात के लिए रख ले। सुबह ऊपर का साफ पानी निथार ले। जो अंश नीचे बैठ जाए उसे छोड़ दे। {छानने के बाद जो बचता है उसे कचरे मे ना फेंके। किसी पेड़ की जड़ में डाल दे। खाद का काम करेगी।}

एक पीतल की कली की हुई कड़ाही (ना मिले तो लौहे की कड़ाही) मे 800 ग्राम देशी घी व का 1.500 किलो काढ़ा व बाकी बारीक पीसा हुआ पाउडर व गूगल के टुकड़े मिलाकर धीमी आग पर पकाए। बीच बीच कड़छी से हिलाते रहे। कुछ समय बाद कड़ाही मे नीचे काला काला चिपचिपा अंश दिखाई देगा। 1 सलाई पर रुई लपेट कर इस पर घी लगाए। इस घी लगी रुई को जलाए। यदि चटर चटर की आवाज आए तो समझे अभी पकाना बाकी है। यदि बिना किसी आवाज के रुई जल जाए तो आग बंद कर दे। जब लगभग सारा पानी जल जाए और केवल घी रह जाए तो आग बंद कर दे। उसके बाद कड़ाही के हल्का ठंडा होने पर ध्यान से घी को एक सूखे बर्तन मे निकाल ले। ध्यान रहे घी पकाते समय मिश्रण पूरी तरह न जले। जब तली मे शहद जैसा गाढ़ा बच जाए तब आग बंद करके घी को अलग कर ले। घी अलग करते समय बर्तन मे जरा सा काले रंग का काढ़ा भी आ जाता है । इसलिए बर्तन से घी को एक चौड़े मुंह की काँच की शीशी मे डाल ले।

प्रयोग विधि- यह घी लगाने व खाने मे प्रयोग करे। जिसको रोग कम हो उसे 1 समय व जिसे रोग अधिक हो उसे सुबह नाश्ते के बाद व रात को सोने से पहले प्रयोग करे। मात्रा – 10 ग्राम छोटे बच्चो को भी दे सकते हैं कम मात्रा मे। इसको लगाने से कुछ दिन बाद दाग का रंग बदलने लगता है। यदि इसको लगाने से यदि जलन हो तो बीच बीच मे इसका प्रयोग बंद कर दे। उस समय नारियल का तेल लगाए। बाद मे जब जलन शांत हो जाए तब फिर दवाई लगाना शुरू कर दे। दाग पर दवाई लगाकर ऊपर किसी भी पेड़ का पत्ता रख कर बांधने से जल्दी लाभ होता है । किसी किसी को इस दवाई के लगभग 20 दिन के प्रयोग के बाद शरीर मे जलन व गर्मी महसूस होने लगती है। तब इसे बीच मे बन्द कर दे। इस दवाई के समय नारियल खाने व नारियल का पानी पीने से जलन नहीं होती।


Friday, 17 August 2018

เค•ुंเคกเคฒी เค”เคฐ เคงเคจ เคธंเคšเคฏ

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कैसे करें धन का संचय
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हर मेहनत  करने वाला व्यक्ति
धनी नहीं होता  
धन कमाना जितना मुश्किल है उतना ही मुश्किल है धन को सम्हालना, धन की बचत करके संचित करना
धन  को सहेजने के  कुछ सूत्र :

कुंडली में  मंगल, बुद्ध और  शनि अगर शुभ प्रभाव में हो तो अतुल धन देते  हैं लेकिन अगर ये जन्मपत्रीका में   कमजोर  हों, पीड़ित हों तो पूर्वजों द्वारा अर्जित धन भी नष्ट हो जाता है  मंगल कमजोर हो तो जातक धन कमा सकता  है जोड़ नहीं सकता                                      **********************************
शनि बली हो तो जातक अपनी मेहनत से धनी होता है
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अगर  शुभ बुध का साथ भी मिल जाये हो तो जातक अपनी सूझ बूझ से धन कमाता है 
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कुंडली में धन कमाने के लिए नवम यानी(9) भाग्य स्थान और ग्यारवा (11) स्थान बहुत महत्वपूर्ण होता है
और धन संचय के लिए(2) दूसरा स्थान होता है अगर ये भाव किसी भी प्रकार से कमज़ोर हो यानी शनि मंगल राहु / केतु से द्रस्तिगत व पीडित और या इनमें बैठे शुभ ग्रह भी पीडित हो तो धन की स्थिती मज़बूत नही होती हम  धन कमा तो सकते है मगर जुड़ नही पाता आगे के खर्च तैयार मिलते है पर अगर इनकी स्थिती मज़बूत है तो जीवन में अधिक संघर्ष नही करना पड़ता और धन जुड़ता रहता है व्यक्ति अच्छा जीवन जीता है
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किस क्षेत्र में नौकरी या  व्यापार करने से धन प्राप्त होगा ये दशम भाव और दशम भाव में स्थित ग्रह  बताते और उसकी शुभ /अशुभ स्थिती और उस पर अन्य ग्रहों के प्रभाव से जानकारी मिलती  है जैसे :-

सूर्य बली दशम भाव में हो और  छठे  भाव का सम्बन्ध आ जाये तो जातक सरकारी               नौकरी से धन  कमाता है, मंगल हो तो जातक सेना व  पुलिस या प्रशासन में नौकरी करता है 
अगर अन्य ग्रहों का योग हो तो जातक मेडिकल, इलेक्ट्रॉनिक सम्बन्धी और , प्रॉपर्टी आदि का व्यापार करता है

बुध हो तो एकाउंट्स,  कॉमर्स,कम्युनिकेशन बेंकिंग,  ब्रोकर और लेखन से धन कमाता है,

गुरु हो तो वकालत, सलाहकार,  शिक्षण,आदि से धनार्जन होता है 

शुक्र हो तो व्यापार, कला, सौंदर्य प्रसाधन, स्त्रियों से संबंधित  सामान आदि से सम्बंधी काम करता है

शनि हो तो बिल्डर्स, लोहा, तेल मशीनरी प्रॉपर्टी बिल्डिंग मेटीरियल  इत्यादि से धन कमाता है  राहु केतु का साथ में होना धनार्जन में कमी करता है
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धन संचय के उपाय : किसी भी हालत में कुंडली में कष्टकारी व खराब ग्रहों कें दोष कें लिऐ उपाय करें  अन्यथा कितना भी धन  कमायेंगे पर धन रुकेगा नहीं
घर कें बुजुर्गों का अपमान न करें अगर वे अपमान के दौर में शारीर छोड़ जाएँ तो भयंकर पितृ दोष लगता है और कई पीढ़ियों तक धन संचय  नहीं होता ईश्वर में आस्था रखें अच्छे समय होने पर अहंकार से व बुरी आदतों से बचे क्योंकि समय एक जैसा नही रहता ! 

प्रतिदिन अपने पूर्वजों से अपने कृत्यों के लिए क्षमा मांगे और आगे कोई गलत काम न करने की प्रतिज्ञा करें , सरकारी नौकरी में हों तो सूर्य को रोज़ाना जल दें,
घर में तुलसी लगाएं,
जन्मपत्रीका में अगर शनि राहु  पीडित हो तो  शिव मंदिर मे 21 शनिवार को  100 ग्राम साबुत बादाम  दान करें ,और  भगवान शिव की रोज़ उपासना करे व शाम को पीपल पर दीप दान कर शनि भगवान से छमा मांगे कुष्ठ , अपंग व्यक्तियों को समय समय पर कुछ खाने की सामग्री दान करते रहें  व अन्य पीड़ित ग्रहों का पता लगाकर  उनका उपाय करें लाभ होगा


เคšเคจ्เคฆ्เคฐ เค”เคฐ เคฎंเค—เคฒ เค—्เคฐเคน

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आज द्विग्रही योग में बात करते है चन्द्र और मंगल ग्रह के बारे में..!!
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चन्द्र-मंगल:--जिन जातकों की कुंडली मे चन्द्र-मंगल का योग हो वे जातक बुद्धिमान, परिश्रमी, कुछ तीक्ष्ण स्वभाव, अपने धर्म एवं नियमों का पालन करने वाला, साहसी एवं कुशल वक्ता, कैमिकल, चर्म, धातु, शिल्प आदि एवं तकनीकी कार्यो में कुशल, क्रय-विक्रय, एवं व्यापार द्वारा अच्छा धनार्जन करने में सफल होता है।
सरकारी या प्राइवेट जॉब में भी हो तो एक से अधिक साधनों द्वारा धन लाभ प्राप्त करने में कुशल होते है।
यह योग तृतीय, पंचम, नवम, दशम, एवं ग्यारहवे भावो में हो तो अच्छा फलप्रद होता है।
दशम में चन्द्र-मंगल का योग होने से उच्चाधिकारी या सेनाध्यक्षकर्ता भी हो सकते है।
प्रथम, चतुर्थ, एवं सप्तम भावो में इसका फल अच्छा नही कहा जा सकता है।
इसके अतिरिक्त यह योग मेष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, मकर, कुम्भ, व मीन लग्नो में विशेष प्रशस्त माना जाता है।
शेष अन्य लग्नो में साधारण फल देखने को मिलता है..!!