Jeevan dharam

Krishna sakhi is about our daily life routine, society, culture, entertainment, lifestyle.

Friday, 5 July 2019

เค†เคงुเคจिเค• เคถिเค•्เคทा

No comments :

कोचिंग का इंजेक्शन लगा कर लौकी की तरह भावी इंजीनियर और डॉक्टर की पैदावार की जाती है। अब नेचुरल देसी नस्ल छोटी रह जाती है जो तनाव में आकर या तो मुरझा जाती है या बाजार में बिकने लायक ही नहीं रहती ।
अब मैं आपको बीस साल पहले ले जाता हूँ  जब सरकारी स्कूलों का दौर था । जब एक औसत लड़के को साइंस ना देकर स्कूल वाले खुद ही लड़के को भट्टी में झोकने से रोक देते थे। आर्ट्स और कामर्स देकर लड़कों को शिक्षक बाबू,पटवारी,नेता और व्यापारी बनाने की तरफ मोड़ देते थे,मतलब साफ है कि पानी को छोटी-छोटी नहरो में छोड़ कर योग्यता के हिसाब से अलग अलग दिशाओ में मोड़ दो ताकि बाढ़ का खतरा ही पैदा ना हो ।
शिक्षक लड़के के गलती करने पर उसको डंडे से पीट-पीटकर साक्षर बनाने पर अड़े रहते और तनाव झेलने के लिये मजबूत कर देते थे और पापा-मम्मी से शिकायत करो तो दो झापड़ पापा-मम्मी भी जड़ देते थे और गुरुजी से सुबह स्कूल आकर ये और कह जाते थे कि अगर नहीं पढ़े तो दो डंडे हमारी तरफ से भी लगाना आप । अब पक्ष और विपक्ष एक होता देख लड़का पिटने के बाद सीधा फील्ड में जाकर खेलकूद करके अपना तनाव कम कर लेता था।खेलते समय गिरता पड़ता और कभी-कभी छोटी-मोटी चोट भी लग जाती तो मिट्टी डाल कर चोट को सुखा देता,पर कभी तनाव में नहीं आता और दसवीं तक आते-आते लड़का लोहा बन जाता था। तनावमुक्त होकर मैदान में तैयार खड़ा हो जाता था ,हर तरह के तनाव को झेलने के लिए.........।
फिर आया कोचिंग और प्राईवेट स्कूलों का दौर यानी कि शिक्षा स्कूल से निकल कर ब्रांडेड शोरुम में आ गई । शिक्षा सोफेस्टीकेटेड हो गई। बच्चे को गुलाब के फूल की तरह ट्रीट किया जाने लगा। मतलब बच्चा 50% लाएगा तो भी साइंस में ही पढ़ेगा। हमारा मुन्ना तो डॉक्टर ही बनेगा। हमारा बच्चा IIT से B.tech करेगा । शिक्षक अगर हल्के से भी मार दे तो पापा-मम्मी मानवाधिकार की किताब लेकर मीडिया वालों के साथ स्कूल पर चढ़ाई कर देते हैं कि हमारे मुन्ना को हाथ भी कैसे लगा दिया? मीडिया वाले शिक्षक के गले में माइक घुुसेड़ कर पूछने लग जाते हैं कि आप ऐसा कैसे कर सकते हैं? यहाँ से आपका बच्चा सॉफ्ट टॉय बन गया बिलकुल टेडी बियर की तरह । अब बच्चा स्कूल के बाद तीन-चार कोचिंग सेंटर में भी जाने लग गया। खेलकूद तो भूल ही गया । फलाने सर से छूटा तो ढिमाके सर की क्लास में पहुंच गया। बचपन किताबों में उलझ गया और बच्चा कॉम्पटीशन के चक्रव्युह में ही उलझ गया बेचारा।क्यों भाई आपका मुन्ना केवल डॉक्टर और इंजीनियर ही क्यों बनेगा वो आर्टिस्ट,सिंगर,खिलाड़ी,किसान और दुकानदार से लेकर नेता और कारखाने का मालिक क्यों नहीं बनेगा। हजारों फील्ड हैं अपनी योग्यता के अनुसार कार्य करने के वो क्यों ना चुनो। अभी कुछ दिनों पहले मेरे महंगे जूते थोड़े से फट गऐ पता किया एक लड़का अच्छी तरह से रिपेयर करता है कि ये पता ही नहीं चलता कि जूते रिपेयर भी हुए हैं । उसके पास गया तो उसने 200 रुपये मांगे रिपेयर करने के और कहा एक हफ्ते बाद मिलेगें जी। उस लड़के की आमदनी का हिसाब लगाया तो पता चला की लगभग एक लाख रुपये महीने कमाता है। यानी की पूरा बारह लाख पैकेज । वो तो कोटा नहीं गया । उसने अपनी योग्यता को हुनर में बदल दिया और अपने काम में मास्टर पीस बन गया। कोई शेफ़ बन कर लाखों के पैकेज़ में फाइव स्टार होटल में नौकरी कर रहा है तो कोई हलवाई बन कर बड़े-बड़े इवेंट में खाना बना कर लाखों रुपये ले रहा है कोई डेयरी फार्म खोल कर लाखों कमा रहा है। कोई दुकान लगा कर लाखों कमा रहा है तो कोई कंस्ट्रक्शन के बड़े-बड़े ठेके ले रहा है। तो कोई फर्नीचर बनाने के ठेके ले रहा है। कोई रेस्टोरेंट खोल कर कमा रहा है तो कोई कबाड़े का माल खरीद कर ही अलीगढ़ जैसे शहर में ही लाखों कमा रहा है तो कोई सब्जी बेच कर भी 20-25 हजार महीने का कमा रहा है तो कोई चाय की रेहड़ी लगा कर ही 40-50 हजार महीने के कमा रहा है तो कोई हमारे यहाँ कचोरी-समोसे और पकोड़े-जलेबी बेच कर ही लाखों रुपये महीने के कमा रहा है। मतलब साफ है भैया कमा वो ही रहा है जिसने अपनी योग्यता और उस कार्य के प्रति अपनी रोचकता को हुनर में बदला और उस हुनर में मास्टर पीस बना । जरुरी नहीं है कि आप डॉक्टर और इंजीनियर ही बनें आप कुछ भी बन सकते हैं आपमें उस कार्य को करने का जुनून हो बस। हाँ तो अभिभावकों/प्रियजनों अपने बच्चों को टैडीबीयर नहीं बल्कि लोहा बनाओ लोहा। अपनी मर्जी की भट्टी में मत झोंको उसको। उसे पानी की तरह नियंत्रित करके छोड़ो वो अपना रास्ता खुद बनाने लग जाएगा। पर बच्चों पर नियंत्रण जरुर रखो । अगर वो अनियंत्रित हुआ तो पानी की तरह आपके जीवन में बाढ़ ला देगा।
कहने का मतलब ये है कि शिक्षा को नेचुरल ही रहने दो,क्योंकि सिंथेटिक बना कर बच्चे का जीवन और अपनी खुशियों को बरबाद कर रहे हो।  बच्चों को उनकी रूचि के अनुसार

आगे बढ़ने में सहयोग दें.. धन्यवाद..
किसी नेक दिल के नेक विचार


เคคुเคฒเคธी เคธेเคตा

No comments :

तुलसी की दो सेवायें हैं

प्रथम सेवा -->
                 तुलसी की जड़ो में ...
         प्रतिदिन जल अर्पण करते रहना !केवल एकादशी को छोड़ कर।

द्वितीय सेवा -->
           तुलसी की मंजरियों को तोड़कर
          तुलसी को पीड़ा मुक्त करते रहना ,
           क्योंकि ~
             ये मंजरियाँ तुलसी जी को
             बीमार करके सुखा देती हैं !

    जब तक ये मंजरियाँ तुलसी जी के
शीश पर रहती हैं , तब तक तुलसी माता
               घोर कष्ट पाती हैं !

            इन दो सेवाओं को ...
             श्री ठाकुर जी की सेवा से
                कम नहीं माना गया है !  
            इनमें कुछ सावधानियाँ रखने की
                        आवश्यक्ता है !

जैसे ~    तुलसी दल तोड़ने से पहले
         तुलसीजी की आज्ञा ले लेनी चाहिए !
            सच्चा वैष्णव बिना आज्ञा लिए ...
       तुलसी दल को स्पर्श भी नहीं करता है !

रविवार और द्वादशी के दिन तुलसी दल को नहीं तोड़ना चाहिए , तथा
कभी भी नाखूनों से तुलसी दल को नहीं तोड़ना चाहिए ! न ही एकादशी को जल देना चाहिये क्यो की इस दिन तुलसी महारानी भी ठाकुर जी के लिये निर्जल व्रत रखती हैं।ऐसा करने से महापाप लगता है !
कारण --> तुलसीजी श्री ठाकुर जी की
             आज्ञा से केवल इन्ही दो दिनों
                 विश्राम और निंद्रा लेती हैं !
बाकी के दिनों में वो एक छण के लिए भी
सोती नही हैं और ना ही विश्राम लेती हैं !
      आठों पहर ठाकुर जी की ही ...
          सेवा में लगी रहती हैं !🙏🙏

🌹🌿🙏 जय श्री राधेकृष्णा🙏🌿 🌹
🌹🌿 🙏जय श्री राधे राधे जी🙏🌿 🌹
🌹🌿 🙏हरि बोल🙏🌿 🌹


เคถ्เคฐी เค•ृเคท्เคฃ เคฌ्เคฐเคน्เคฎเคšाเคฐी เคนै

No comments :
 เคฌाเคฐ เค—ोเคชिเคฏों เคจे เคถ्เคฐी เค•ृเคท्เคฃ เคธे เค•เคนा เค•ि, ‘เคนे เค•ृเคท्เคฃ เคนเคฎे เค…เค—เคธ्เคค्เคฏ เค‹เคทि เค•ो เคญोเค— เคฒเค—ाเคจे เค•ो เคœाเคจा เคนै, เค”เคฐ เคฏे เคฏเคฎुเคจा เคœी เคฌीเคš เคฎें เคชเคก़เคคी เคนै | เค…เคฌ เคคुเคฎ เคฌเคคाเค“ เคนเคฎ เค•ैเคธे เคœाเคं? 

เคญเค—เคตाเคจ เคถ्เคฐी เค•ृเคท्เคฃ เคจे เค•เคนा เค•ि, เคœเคฌ เคคुเคฎ เคฏเคฎुเคจा เคœी เค•े เคชाเคธ เคœाเค“ เคคो เค‰เคจเคธे เค•เคนเคจा เค•ि, เคนे เคฏเคฎुเคจा เคœी เค…เค—เคฐ เคถ्เคฐी เค•ृเคท्เคฃ เคฌ्เคฐเคน्เคฎเคšाเคฐी เคนै เคคो เคนเคฎें เคฐाเคธ्เคคा เคฆो | เค—ोเคชिเคฏाँ เคนंเคธเคจे เคฒเค—ी เค•ि, เคฒो เคฏे เค•ृเคท्เคฃ เคญी เค…เคชเคจे เค†เคช เค•ो เคฌ्เคฐเคน्เคฎเคšाเคฐी เคธเคฎเคเคคे เคนै, เคธाเคฐा เคฆिเคจ เคคो เคนเคฎाเคฐे เคชीเค›े เคชीเค›े เค˜ूเคฎเคคा เคนै, เค•เคญी เคนเคฎाเคฐे เคตเคธ्เคค्เคฐ เคšुเคฐाเคคा เคนै เค•เคญी เคฎเคŸเค•िเคฏा เคซोเคก़เคคा เคนै … เค–ैเคฐ เคซिเคฐ เคญी เคนเคฎ เคฌोเคฒ เคฆेंเค—ी |

 เค—ोเคชिเคฏाँ เคฏเคฎुเคจा เคœी เค•े เคชाเคธ เคœाเค•เคฐ เค•เคนเคคी เคนै, เคนे เคฏเคฎुเคจा เคœी เค…เค—เคฐ เคถ्เคฐी เค•ृเคท्เคฃ เคฌ्เคฐเคน्เคฎเคšाเคฐी เคนै เคคो เคนเคฎे เคฐाเคธ्เคคा เคฆें, เค”เคฐ เค—ोเคชिเคฏों เค•े เค•เคนเคคे เคนी เคฏเคฎुเคจा เคœी เคจे เคฐाเคธ्เคคा เคฆे เคฆिเคฏा | เค—ोเคชिเคฏाँ เคคो เคธเคจ्เคจ เคฐเคน เค—เคˆ เคฏे เค•्เคฏा เคนुเค† ? เค•ृเคท्เคฃ เคฌ्เคฐเคน्เคฎเคšाเคฐी ? !!! เค…เคฌ เค—ोเคชिเคฏां เค…เค—เคธ्เคค्เคฏ เค‹เคทि เค•ो เคญोเคœเคจ เค•เคฐเคตा เค•เคฐ เคตाเคชเคธ เค†เคจे เคฒเค—ी เคคो เค‰เคจ्เคนोंเคจे เค…เค—เคธ्เคค्เคฏ เค‹เคทि เคธे เค•เคนा เค•ि, เค…เคฌ เคนเคฎ เค˜เคฐ เค•ैเคธे เคœाเคं ? เคฏเคฎुเคจाเคœी เคฌीเคš เคฎें เคนै | เค…เค—เคธ्เคค्เคฏ เค‹เคทि เคจे เค•เคนा เค•ि เคคुเคฎ เคฏเคฎुเคจा เคœी เค•ो เค•เคนเคจा เค•ि เค…เค—เคฐ เค…เค—เคธ्เคค्เคฏเคœी เคจिเคฐाเคนाเคฐ เคนै เคคो เคนเคฎें เคฐाเคธ्เคคा เคฆें | 

เค—ोเคชिเคฏाँ เคฎเคจ เคฎें เคธोเคšเคจे เคฒเค—ी เค•ि เค…เคญी เคนเคฎ เค‡เคคเคจा เคธाเคฐा เคญोเคœเคจ เคฒाเคˆ เคธो เคธเคฌ เค—เคŸเค• เค—เคฏे เค”เคฐ เค…เคฌ เค…เคชเคจे เค†เคช เค•ो เคจिเคฐाเคนाเคฐ เคฌเคคा เคฐเคนे เคนैं? เค—ोเคชिเคฏां เคฏเคฎुเคจा เคœी เค•े เคชाเคธ เคœाเค•เคฐ เคฌोเคฒी, เคนे เคฏเคฎुเคจा เคœी เค…เค—เคฐ เค…เค—เคธ्เคค्เคฏ เค‹เคทि เคจिเคฐाเคนाเคฐ เคนै เคคो เคนเคฎे เคฐाเคธ्เคคा เคฆें, เค”เคฐ เคฏเคฎुเคจा เคœी เคจे เคฐाเคธ्เคคा เคฆे เคฆिเคฏा | 

เค—ोเคชिเคฏां เค†เคถ्เคšเคฐ्เคฏ เค•เคฐเคจे เคฒเค—ी เค•ि เคœो เค–ाเคคा เคนै เคตो เคจिเคฐाเคนाเคฐ เค•ैเคธे เคนो เคธเค•เคคा เคนै? เค”เคฐ เคœो เคฆिเคจ เคฐाเคค เคนเคฎाเคฐे เคชीเค›े เคชीเค›े เคซिเคฐเคคा เคนै เคตो เค•ृเคท्เคฃ เคฌ्เคฐเคน्เคฎเคšाเคฐी เค•ैเคธे เคนो เคธเค•เคคा เคนै? เค‡เคธी เค‰เคงेเฅœเคฌुเคจ เคฎें เค—ोเคชिเคฏों เคจे เค•ृเคท्เคฃ เค•े เคชाเคธ เค†เค•เคฐ เคซिเคฐ เคธे เคตเคนी เคช्เคฐเคถ्เคจ เค•िเคฏा | 

เคญเค—เคตाเคจ เคถ्เคฐी เค•ृเคท्เคฃ เค•เคนเคจे เคฒเค—े, เค—ोเคชिเคฏों เคฎुเคे เคคुเคฎाเคฐी เคฆेเคน เคธे เค•ोเคˆ เคฒेเคจा เคฆेเคจा เคจเคนीं เคนै, เคฎैं เคคो เคคुเคฎ्เคนाเคฐे เคช्เคฐेเคฎ เค•े เคญाเคต เค•ो เคฆेเค– เค•เคฐ เคคुเคฎ्เคนाเคฐे เคชीเค›े เค†เคคा เคนूँ | เคฎैंเคจे เค•เคญी เคตाเคธเคจा เค•े เคคเคนเคค เคธंเคธाเคฐ เคจเคนीं เคญोเค—ा เคฎैं เคคो เคจिเคฐ्เคฎोเคนी เคนूँ | เค‡เคธीเคฒिเค เคฏเคฎुเคจा เคจे เค†เคช เค•ो เคฎाเคฐ्เค— เคฆिเคฏा | 

เคคเคฌ เค—ोเคชिเคฏां เคฌोเคฒी เคญเค—เคตเคจ, เคฎुเคจिเคฐाเคœ เคจे เคคो เคนเคฎाเคฐे เคธाเคฎเคจे เคญोเคœเคจ เค—्เคฐเคนเคฃ เค•िเคฏा เคซिเคฐ เคญी เคตो เคฌोเคฒे เค•ि เค…เค—เคค्เคธ्เคฏ เค†เคœเคจ्เคฎ เค‰เคชเคตाเคธी เคนो เคคो เคนे เคฏเคฎुเคจा เคฎैเคฏा เคฎाเคฐ्เค— เคฆें! เค”เคฐ เคฌเฅœे เค†เคถ्เคšเคฐ्เคฏ เค•ी เคฌाเคค เคนै เค•ि เคฏเคฎुเคจा เคจे เคฎाเคฐ्เค— เคฆे เคฆिเคฏा! เคถ्เคฐी เค•ृเคท्เคฃ เคนंเคธเคจे เคฒเค—े เค”เคฐ เคฌोเคฒे เค•ि, เค…เค—เคค्เคธ्เคฏ เค†เคœเคจ्เคฎ เค‰เคชเคตाเคธी เคนैं | เค…เค—เคค्เคธ्เคฏ เคฎुเคจि เคญोเคœเคจ เค—्เคฐเคนเคฃ เค•เคฐเคจे เคธे เคชเคนเคฒे เคฎुเคे เคญोเค— เคฒเค—ाเคคे เคนैं | เค”เคฐ เค‰เคจเค•ा เคญोเคœเคจ เคฎें เค•ोเคˆ เคฎोเคน เคจเคนीं เคนोเคคा เค‰เคจเค•ो เค•เคคเคˆ เคฎเคจ เคฎें เคจเคนीं เคนोเคคा เค•ि เคฎें เคญोเคœเคจ เค•เคฐूं เคฏा เคญोเคœเคจ เค•เคฐ เคฐเคนा เคนूँ | เคตो เคคो เค…เคชเคจे เค…ंเคฆเคฐ เคฐเคน เคฐเคนे เคฎुเคे เคญोเคœเคจ เค•เคฐा เคฐเคนे เคนोเคคे เคนैं, เค‡เคธเคฒिเค เคตो เค†เคœเคจ्เคฎ เค‰เคชเคตाเคธी เคนैं | เคœो เคฎुเคเคธे เคช्เคฐेเคฎ เค•เคฐเคคा เคนै, เคฎैं เค‰เคจเค•ा เคธเคš เคฎें เค‹เคฃी เคนूँ, เคฎैं เคคुเคฎ เคธเคฌเค•ा เค‹เคฃी เคนूँ...เคœเคฏ เคœเคฏ เคถ्เคฐी เคฐाเคงेเค•ृเคทเคฃा เคœी।