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Thursday, 31 August 2017
॥ राधा चालीसा ॥
॥ दोहा ॥
श्री राधे वृषभानुजा, भक्तिन प्राणाधार।
वृन्दाविपिन विहारिणी, प्रणवौं बारंबार॥ कृष्णा
जैसो तैसो रावरौ, कृष्ण प्रिया सुखधाम।
चरण शरण निज दीजिये, सुन्दर सुखद ललाम॥
॥ चौपाई ॥
जय वृषभानु कुँवरि श्री श्यामा, कीरति नंदिनी शोभा धामा॥ (१)
नित्य बिहारिनि श्याम अधारा, अमित मोद मंगल दातारा॥ (२)
रास विलासिनि रस विस्तारिनि, सहचरि...
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