Sunday, 13 May 2018
रत्नो का आपसी सम्बन्ध
रत्नो का आपसी सम्बन्ध
रत्न हम मनुष्यों को आदि काल से ही अपनी तरफ आकर्षित करते रहे है । रत्नो का अपना एक अलग ही महत्वपूर्ण संसार है । हमारे ज्योतिषी अनिष्ट ग्रहों के प्रभाव को कम करने के लिए या जिस ग्रह का प्रभाव कम पड़ रहा हो उसमें वृद्धि करने के लिए उस ग्रह के रत्न को धारण करने का परामर्श देते हैं। और यदि हम इनका सही उपयोग कर सके तो हमें निश्चय ही अभीष्ट लाभ प्राप्त हो सकेगा । लेकिन किस रत्न की किस रत्न के साथ मैत्री है और किसकी शत्रुता हमें इस बात कि भी अवश्य ही जानकारी होनी चाहिए ।
कौन-कौन से रत्न हमें एक साथ पहनने चाहिए, और कौन से नहीं हम यहाँ पर आपको इस बारे में ज्योतिषियों की राय बता रहे है ……
1. माणिक्य के साथ :नीलम, गोमेद, लहसुनिया पहनना वर्जित है।
2. मोती के साथ : हीरा, पन्ना, नीलम, गोमेद, लहसुनिया पहनना वर्जित है।
3. मूंगा के साथ : पन्ना, हीरा, गोमेद, लहसुनिया पहनना वर्जित है।
4. पन्ना के साथ :मूंगा, मोती पहनना वर्जित है।
5. पुखराज के साथ :हीरा, नीलम, गोमेद पहनना वर्जित है।
6. हीरे के साथ :माणिक्य, मोती, मूंगा, पुखराज पहनना वर्जित है।
7. नीलम के साथ :माणिक्य, मोती, पुखराज पहनना वर्जित है।
8. गोमेद के साथ:माणिक्य, मूंगा, पुखराज पहनना वर्जित है।
9. लहसुनिया के साथ :माणिक्य, मूंगा, पुखराज, मोती पहनना वर्जित है।
रत्न धारण
रत्न धारण - Gems Stones Astrology Know Stone as per Name and Rashi
मेष राशि Aries Mesh Rashi (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
राशि का स्वामी - मंगल , रत्न - मूंगा, उपरत्न - लाल हकीक, लाल ओनेक्स, तामडा, लाल गोमेद, धारण करने का वार - मंगलवार
वृष राशि Taurus Vrishabh Rashi ( इ, उ, ए, ओ, वा, वि, वू, वे, वो)
राशि का स्वामी - शुक्र , रत्न - हीरा , उपरत्न - सफ़ेद हकीक, ओपल स्फटिक, सफ़ेद पुखराज, जरकन, धारण करने का वार - शुक्रवार
मिथुन राशि Gemini Mithun Rashi (का, की, कू, घ, ड़, छ, के, को, हा)
राशि का स्वामी - बुध , रत्न - पन्ना, उपरत्न - हरा हकीक, ओनेक्स, फिरोजा , मरगज, धारण करने का वार - बुधवार
कर्क राशि Cancer Kark Rashi (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
राशि का स्वामी - चन्द्र, रत्न - मोती, उपरत्न - दुधिया हकीक, सफ़ेद मूंगा, सफ़ेद पुखराज, चन्द्रकांतमणि, धारण करने का वार - सोमवार
सिंह राशि Leo Sinh Rashi (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
राशि का स्वामी - सूर्य , रत्न - माणिक, उपरत्न - रतवा हकीक, तामडा, स्टार माणक, लाल तुरमली, धारण करने का वार - रविवार
कन्या राशि Virgo Kanya Rashi (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
राशि का स्वामी - बुध, रत्न - पन्ना , उपरत्न - हरा हकीक, ओनेक्स, मरगज, फिरोजा, जबरजदद, धारण करने का वार - बुधवार
तुला राशि Libra Tula Rashi (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
राशि का स्वामी - शुक्र, रत्न - हीरा, उपरत्न - सफ़ेद हकीक, ओपल स्फटिक, सफ़ेद पुखराज, सफ़ेद मूंगा , धारण करने का वार - शुक्रवार
वृश्चिक राशि Scorpio Vrishchik Rashi (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
राशि का स्वामी - मंगल , रत्न - मूंगा, उपरत्न - लाल हकीक, लाल ओनेक्स, तामडा, लाल तुरमली, धारण करने का वार - मंगलवार
धनु राशि Sagittarius Dhanu Rashi (ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)
राशि का स्वामी - गुरु , रत्न - पुखराज, उपरत्न - पीला हकीक, सुनहला, पीला गोमेद, बैरुज, धारण करने का वार - वृहस्पतिवार
मकर राशि Capricorn Makar Rashi (भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)
राशि का स्वामी - शनि , रत्न - नीलम, उपरत्न - कटैला, काला स्टार, लाजवर्त धारण करने का वार - शनिवार
कुंभ राशि Aquarius Kumbha Rashi (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
राशि का स्वामी - शनि , रत्न - नीलम, उपरत्न - कटैला, काला हकीक, काला स्टार, लाजवर्त गोमेद, धारण करने का वार - शनिवार
मीन राशि Pisces Meen Rashi (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
राशि का स्वामी - गुरु , रत्न - पुखराज, उपरत्न - पीला हकीक, सुनहला, लहसुनिया, धारण करने का वार - वीरवार
GEMS THERAPY - रत्न और उपरत्न से रोगों का इलाज - Disease treatment with Ratna and Upratna
- हार्ट अटैक - कहरवा, यश व रुद्राक्ष
- बवासीर - संगेरियम
- सामाजिक प्रतिष्ठा / व्यापार वृद्धि - पन्ना, पुखराज, मून स्टोन
- ब्लड प्रेशर - मेग्नेटिक गनमेटल, Blood Stone, (For Low BP - नीलम & For High BP - मूंगा)
- स्वास्थ्य वृद्धि रत्न - पुखराज
- खून की खराबी - मूंगा
- गुर्दे - Kedney Stone
- दुर्धटना से रक्षा - मूंगा, मोती
- शत्रु पर विजय - मूंगा, गोमेद
- कोर्ट कचहरी व मुक़दमे में लाभ - गोमेद
- गठिया (Arthritis) - पुखराज, मूंगा
- सुगर- सफ़ेद मूंगा
- किसी भी दर्द में लाभ - गारनेट
- आत्म विश्वास में कमी होने पर - मूंगा, पन्ना
- वीर्य दोष - हीरा, सफ़ेद पुखराज, स्फटिक
- पेट की बीमारी या गैस प्रॉब्लम - लहसुनिया, गोमेद
- गर्भपात होने से रोकने के लिए - माणिक
- शराब छुडाने के लिए - कटैला
- क्रोध शांति - पन्ना, मोती
- मिर्गी रोग के लिए - मोती, लाजवर्त
रत्न धारण की परंपरा
मारी भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति में प्राचीन काल से ही रत्न धारण की परंपरा रही है। नाना प्रकार के कार्यों की सिद्धि के लिए रत्न-उपरत्न धारण करने से लाभ प्राप्त होता है। कन्या के शीघ्र विवाह हेतु: यदि किसी कन्या के विवाह में परेशानियां आ रही हों, तो जन्मकुंडली दिखाकर पुखराज धारण करने से वे परेशानियां दूर होती हैं। सरकारी नौकरी में उन्नति के लिएः सरकारी विभाग में नौकरी में पदोन्नति में बार-बार बाधाएं आ रही हों अथवा परेशानियां अधिक हांे तो जन्मपत्री की जांच कराकर अच्छी गुणवत्ता वाला माणिक्य धारण करने से लाभ होता है। कोर्ट-कचहरी की बाधाओं के निवारण हेतु: यदि कोर्ट कचहरी की समस्याएं बार-बार आती हों, तो अच्छी गुणवत्ता वाला मूंगा धारण करने से समस्या के निवारण में कठिनाइयां कम होती हैं और कार्य शीघ्रता से संपन्न होता है। पति-पत्नी के बीच कलह से मुक्ति के लिए: पति-पत्नी के बीच यदि परस्पर प्रेम आकर्षण में कमी हो, अनबन बनी रहती हो, तो फिरोजा रत्न धारण करने से मनोमालिन्य दूर होता है तथा प्रेम आकर्षण में वृद्धि होती है। तंत्र-मंत्र नजर दोष आदि से रक्षा के लिए: यदि तंत्र-मंत्र, जादू-टोने, नजर लगने आदि का भय बना रहता हो तो पन्ना रत्न धारण करने से भय से मुक्ति मिलती है तथा इन दोषों से रक्षा होती है। मानसिक शांति के लिए: यदि मानसिक तनाव बना रहता हो, सब सुख सुविधाएं होते हुए भी मानसिक संतुष्टि न रहती हो, तो मोती और रुद्राक्षयुक्त माला धारण करने से लाभ होता है। संपूर्ण बाधाओं से रक्षा के लिए: जीवन में अनेक प्रकार की बाधाओं से बचने तथा सभी प्रकार की खुशहाली के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली नवरत्न माला अथवा नवरत्न अंगूठी धारण करने से लाभ प्राप्त होता है। लड़के के शीघ्र विवाह के लिए: यदि लड़के का विवाह न हो रहा हो, बार-बार बाधाएं आ रही हों, तो अच्छी गुणवत्ता वाला ओपल अंगूठी में धारण करने से बाधाएं दूर होती हंै। पेट संबंधी बीमारी तथा कार्यों में रुकावट के निवारण के लिए: यदि पेट से संबंधित कोई समस्या हो बार-बार औषधि के उपयोग से भी लाभ न हो रहा हो ऐसी स्थिति में बायें हाथ की मध्यमा में पंच धातु की अंगूठी में शनिवार को सूर्य अस्त होने के बाद गोमेद धारण करने से लाभ होने की संभावना होती है। साथ ही यदि कार्यों में रुकावटें अधिक आ रही हांे तो ऐसी परिस्थिति में भी गोमेद धारण करने से लाभ होता है। भूत प्रेतादि बाधा निवारण के लिएः यदि भूत प्रेतादि बाधा के कारण पारिवारिक अशांति बनी रहती है। बुरे स्वप्न दिखाई देते हों ऐसी स्थिति में लहसुनिया रत्न को पंचधातु की अंगूठी में बुधवार के दिन कनिष्ठिका में धारण करने से लाभ होता है। जिन बीमारियों की जांच करने पर भी पता न चलता हो दवाई असर न कर रही हो ऐसी परिस्थितियों में भी यह रत्न धारण करने से लाभ होने की संभावना होती है। दवाई असर करने लगती है। अगर यदि कोई भी इन असली रत्नों को धारण करने में असमर्थ हो तो इनके स्थान पर इनके उपरत्न जैसे पन्ना के उपरत्न अनाॅस्क, पुखराज का सुनेला, नीलम का नीली आदि रत्नों के उपरत्न धारण करने से भी सामान्यतः लाभ होता है। यदि अंगूठी में इनको धारण करने में असुविधा हो रही हो तो इन रत्नों को लाॅकेट रूप में गले में धारण करने से भी लाभ प्राप्त होता है विशेष जानकारी के लिए किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श लेकर रत्न धारण कर सकते हैं।
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